जब जब देश को कुर्बानी देने की बात आती है तो ह्मारे नेताओ दवारा अप्ने अलावा एसे लोगो की तारीफ शुरु कर देते है जीनका कुर्बानीयो से कीसी न कीसी तराहा का सरोकार राहा है । और वो सीर्फ इस लीये ताकी कुर्बानी देने के लीये जनता कही उनका चुनाव ना कर ले । जब्की ये बात सही है की देश की सीमा पर और देश के अन्दर देश के दुशमनो से लड रहे सीपाहीयो द्वारा अप्नी जान कुर्बानी के प्रस्तुत कर चुकने के वक्त भी नेता केवल अप्नी कुर्सी कायम रख्ने का दांव पेच खेल राहा होता है ।याहा यह गॉर करने वाली बात है की देश का सिपाही चाहे वो देश के अन्दुरुनी हीस्से मे हो चाहे वो सीमाऔ पर हो , चाहे वो अपने परीवार के लीए अभाव को दुर न कर पाराहा हो पर देश और देश वासीयो की रक्षा मे अपने प्राणो को खर्च करने मे कभी देर नही करता और कंजुसी भी नही । हम सब को देश के सीपाहीयो के इस बलीदानी जज्बो को न केवल सलाम करना चाहीये बल्की समाज मे उन्को समय समय पर सम्मान भी देते रह्ना होगा यही एक सीपाही की पुजीं हो सक्ती है जीस्से प्रभावीत हो कर सीपाही कह्ने मे हीच्के गा नही की देश के सीवाये मेरा दुसरो न कोइ ।
Showing posts with label देश प्रेम. Show all posts
Showing posts with label देश प्रेम. Show all posts
Saturday, 19 May 2012
Friday, 11 May 2012
मेरे घर ना आना भगत ................................
आज मेरा ख्याल अचानक समाचार पत्रो और समाचार चैंनलो पर जा कर ठहर गया और फीर मेरे अंदर एक मंथन रुपी दवध्ध चलने लगा । आज़ देश मे हर चोथा आदमी दुसरे को चोर, भ्रष्टाचारी, अत्याचारी और लुटेरा साबीत करने मे लगा हुआ है । और एसा करने मे वो अप्ना दाईत्व, जिम्मेदारी, और वो सब भुला बैठ्ता है जो एक मर्यादा के रुप मे हमे कानुन से बान्धती है । चोरी, भ्रष्टाचार, अत्याचार और लुट के वीरोध मे जित्ने लोग दुसरे लोगो को जगाने मे लगे है वो खुद इस सब के खीलाफ क्मरकस के लग जाये तो ये सब अप्ने आप ही समाप्त हो सक्ता है । जब तक दुसरो को जगाने की बात है तो लोग बड चड के हीस्सा लेते है पर जैसे ही खुद की बारी खुद के घर से क्रांती शुरु कर्ने की आती है तो लोग बगले झाकते नजर आते है । अर्थात कीसी क्रांती मे कुर्बानी देने हेतु लोग यही इरादा रखते है की कुर्बानी देने वाला भगत, सुखदेव, राजगुरु उनके आगन मे पैदा ना हो पडोसी के घर ही कुर्बानी की जीम्मेदारी हो ?
Subscribe to:
Posts (Atom)