होनी चाहीये बहस जरुर हा जरुर होनी चाहीये बहस एक कीसान पर , कीसान की मौत पर , सीमा पर सीपाही की हालत पर , आतंकवाद से लडते मरते सीपाही पर , हा संसद मे लड्ते नेताओ की सोच पर , दल और गुटो मे बटे नेताओ पर , कीसी क्रीकेट खीलाडी के पाव की मोच पर , रीश्वत लेते अधीकारी पर , काम से जी चुराते कर्मचारी पर , व्यपार मे मरते व्यपारी पर बहस होनी ही चाहीये ।लींग आनुपात मे बडती खाई पर , कोख मे मरती माई पर बलातकारी भाई पर , राजनीती की डाई पर बहस होनी ही चाहीये । पाकीस्तान और अपने रीश्ते पर , दोनो देशो के नक्शे पर ,चीन की गुंडागर्दी पर , सेना की वर्दी पर होनी ही चाहीये बहस। मा की ममता पर , समाजो की क्षमता पर , ममता के गुस्से पर बहस होनी ही चाहीये । प्यासे मरते खेतो पर , हस्पतालो मे मरते बच्चो पर , बड्ता वजन बस्तो पर बहस का वीषय ही है । गीरते उत्पादन पर रुपये की हालत पर , साधु संतो की राजनीती पर , अन्ना ह्जारे , और बाबा की हालत पर उनके आन्दोलन पर बहस जरुरी है । सी.बी. आई की स्वत्ंत्रता पर ,देश की अख्णता पर , जाती वादी जनसख्या की गणना पर बहस आवश्यक है । जरुरी है हर बहस बहुत जरुरी है भाई पर हो आगे कोई नई बहस उस्के पहले पीछ्ली बहस क हीसाब होना चाहीये ............. नही है कोई हीसाब पीछ्ली बहस का तो नई बहस औचीत्य हीन होगी , हो अगर फीर भी बहस तो बहसो के हीसाब पर फीर एक बहस जरुरी हो .......................पर हो बहस जरुर हो